budhiya ki kahani

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budhiya ki kahani 1 

समझदार बूढीया की कहानी 

budhiya ki kahani
ek budhiya ki kahani

9 min ki budhiya ki kahani

 बहुत पुरानी बात है जापान में जंगलों से घिरे एक गांव में एक युवा किसान अपनी बूढ़ी मां के साथ रहता था।  वहां का राजा बहुत क्रूर और अत्याचारी था
"70 साल से ज्यादा उम्र के लोग किसी भी काम के नहीं होते"
राजा ने ऐलान किया
"इसलिए उन्हें मरने के लिए पहाड़ी पर अकेला छोड़ दिया जाएगा"
जब युवा किसान की मां 70 साल की हुई तो वह क्या करें यह उसे कुछ समझ में नहीं आया वह अपनी मां के पहाड़ी पर मरने की बात सोच तक नहीं सकता था। जो शब्द वह नहीं कह पाया उसकी मां ने कही "बेटा अब मुझे पहाड़ी पर छोड़कर आने का वक्त आ गया है" मा ने हल्की सी आवाज में कहा। फिर अगले दिन सुबह-सुबह किसान ने अपनी मां को कंधे पर उठाया। पर बड़ी बेमनी से पहाड़ी पर चढ़ने लगा। पहाड़ी पर वह बहुत ऊँचा चढ़ा। अंत में पेड़ों के झुरमुट में पगडंडी गुम हो गई और सूरज भी छुप गया। अब उसे किसी चिड़िया की चहचहाहट तक सुनाई नहीं दे रही थी. उसे सिर्फ पेड़ों के बीच बहती हवा की तेज साय साय सुनाई दे रहा थी। पर वह और ऊंचाई पर चढ गया। फिर उसे  कुछ दिया। जैसे-जैसे वह पेड़ों के नीचे से गुजर रहे थे वैसे वैसे मां छोटी टहनियां तोड़कर नीचे फेंक रही थी।
"मैं रास्ते में छोटी-छोटी टहनियां गिरा रही हूं बेटा जिस से लौटते वक्त तुम्हें रास्ता खोजने में ज्यादा दिक्कत ना हो" मां ने कहा।

अब सब कुछ युवा किसान की बर्दाश्त से बाहर हो गया था।
"मां मैं तुम्हें पहाड़ी के इस वीराने में छोड़कर नहीं जा सकता" किसान ने कहा
"अब हम दोनों घर वापस जाएंगे मैं तुम्हें कभी भी अपने से अलग नहीं रहने दूंगा"
फिर रात के साए अंधेरे में किसान अपनी मां को वापस घर लाया। उसने अपने किचन के नीचे एक गुप्त तहखाना बनाया। तब से मा उस छोटे कमरे में रहने लगी। वह दिनभर कताई बुनाई करती रहती थी। इस तरह 2 साल बीत गए और किसी को भी किसान के गुप्त रहस्य का पता नहीं चला। फिर एक दिन एक खूंखार योद्धा उनके गांव में पहाड़ी तूफान जैसा आया
"मैं सम्राट हेल्गा का दूत  हूँ" वह राजा को देखकर चिल्लाया
"3 सूरज उगने और 3 चाँद ढलने के बाद सम्राट हेल्गा तुम्हारे राज्यों को पराजित करेगा"
गांव का राजा बहुत बहादुर नहीं था।
"अगर आप मुझे बख्श दे तो फिर आप जो कहेंगे वह मैं करूंगा" राजा ने दूत  से प्रार्थना की
"सम्राट हेल्गा कभी किसी को माफ नहीं करते"
योद्धा ने गरजते हुए कहा
"पर वह होशियारी के कायल है, अगर तुम इस कागज पर लिखे इन तीन मुश्किल सवालों का उत्तर दे पाए तब तुम्हारी जागीर सुरक्षित रहेगी"
उसके बाद योद्धा उस कागज को फेंक कर उसी तेजी से गायब हो गया जैसे वह आया था।
"सबसे पहले राख से रस्सी बनाओ"
राजा ने पढ़ा
"दूसरा एक तेरे मेरे लकड़ी के तन के अंदर से एक धागे को पिराओ"
"तीसरा एक ऐसी ढोलक बनाओ जो बिना पिटे आवाज करें"

उसके बाद राजा ने अपने राज्य की सबसे समझदार लोगों को इकट्ठा किया और उनसे उन कठिन और असंभव प्रश्नों के उत्तर ढूंढने को कहा। होशियार लोगों की मंडली पूरी रात उन सवालों के बारे में सोचती रही झूझती रही। फिर सुबह हुई और मुर्गे ने बांग दी और अभी वह एक सवाल का उत्तर भी नहीं खोज पाए थे। उसके बाद वह दौड़े-दौड़े गांव के मंदिर में गए और वहां जाकर उन्होंने पीतल के बड़े घंटे को जोर जोर से बजाया, हमारी मदद करो। उन्होंने देवताओं से प्रार्थना की और भगवान बिल्कुल चुपचाप साधे बैठे रहे। उसके बाद वे जंगल के समझदार जानवर उद्बिलाओ के पास गए। कई बार जानवर इंसानों से ज्यादा समझदार होते हैं,
"तुम जरूर हमारी मदद कर पाओगे"
उन्होंने बड़ी आतुरता से कहा पर जवाब में उद्बिलाओ ने सिर्फ अपना सिर ही हिलाया।
"वैसे मैं होशियार हूं"
उसने कहा "पर इन असंभव पहेलियों का मेरे पास कोई जवाब नहीं है"
अंत में जब वह समझदार पंडित, राजा के पास बिना किसी उत्तर के खाली हाथ लौटे तो राजा उन पर एकदम बरस पड़ा।
"तुम लोग एक नंबर के गधे हो"
वह चिल्लाया उसने तुरंत उन समझदार लोगों को काली कोठरी में बंद करवा दिया। उसके बाद राजा ने गांव के मुख्य चौक पर एक पोस्टर लगवा या जो भी उन पहेलियों का जवाब देगा उसे सोने की मोहरओं की एक थैली इनाम में मिलेगी। युवा किसान ने भी वह पोस्टर पढा। फिर वह दौड़ा-दौड़ा घर आया। उसने मां को सम्राट हेल्गा कि वह तीन कठिन सवाल बताएं।
"हम क्या कर सकते हैं?"
उसने उदास होकर मां से कहा।
"जल्द ही सम्राट हेल्गा हम पर कब्जा कर लेगा"
मां ने कुछ देर गंभीरता से सोचा फिर उसने अपने लड़के से एक रस्सी, छेद वाला लकड़ी का तना और एक छोटी ढोलक लाने को कहा। किसान जब वह चीजें इकट्ठी करके लाया तो मां ने अपना काम शुरू किया।

सबसे पहले मां ने रस्सी को नमकीन पानी में भिगोया और फिर उसे अच्छी तरह सुखाया।  माचिस से जलाया। रस्सी पूरी जलने के बाद भी रस्सी गिरी नहीं। उसका आकार वैसा ही बना रहा।
"यह लो",
मां ने कहा
"यह रही राख की बनी रस्सी"
फिर मा ने लकड़ी के टेड़े तने के छेद के एक छोर पर कुछ शहद लगाया। उसने चिंटी से रेशम का एक मशीन धागा बांधा और तने के दूसरे छोर पर उसे रखा। किसान ने उसे बड़े अचरज से देखा। शहद की तलाश में जुटी चींटी जल्दी ही तने के दूसरे छोर से बाहर निकली। चिंटी के साथ रेशम का धागा भी था। अब दूसरी समस्या भी हल हो गई। अंत में बूढ़ी औरत ने छोटी ढोलक को एक और से खोला। उसने ढोलक के अंदर एक भंवरा रखा। और फिर से ढोलक को बंद किया। फिर जब भवरे ने ढोलक में से निकलने की कोशिश की तब वह बार-बार ढोलक के चमड़े से टकराया। उससे बिना बजाए ढोलक धीरे-धीरे बजने लगी। अब तीसरी समस्या का भी हल मिल गया था। जब युवा किसान ने राजा को तीनों समस्याओं के हल दिखाएं तो वह बेहद अचंभित हुआ।
"देखो तुम जैसा युवक किसान गांव के बड़े बूढ़ों से ज्यादा समझदार नहीं हो सकता"
उसने कहा
"मुझे सच सच बताओ ये असंभव लगने वाली समस्याओं को सुलझाने में तुम्हारी किसने मदद की?"
युवा किसान झूठ नहीं बोल सकता था। उसने राजा को सच बताया कि कैसे उसने अपनी मां को पिछले 2 सालों से घर में छुपा रखा था।
"मेरी मां ने ही सम्राट हेल्गा कि इन तीनों समस्याओं का हल निकाल कर हमारे गांव को बचाया है"
उसने समझाया। युवा किसान को लगा कि राजा उसे भी जेल की काली कोठरी में बंद करवा देगा पर गुस्सा होने की बजाय राजा बहुत देर तक शांत रहा और सोचता रहा,
"मैंने गलती की"
राजा ने अंत में कहा "
"आज से मैं किस किसी भी बुरे इंसान को मरने के लिए पहाड़ी पर नहीं भेजूंगा"
"आज से गांव में बूढ़े लोगों के साथ सभी लोग आदर से पेश आएंगे"
"बूढ़े लोग हमें अपनी समझदारी सिखाएंगे"

उसके बाद राजा ने जेल की काली कोठरियों से सब बंदियों को रिहा किया। राजा ने युवा किसान की  मां को बुलाकर उन्हें तीन सोने की मोहर् की थैलियां इनाम में दी। अंत में राजा ने युवा किसान को अपने सभी बहादुर सैनिकों के साथ समस्याओं के हल को लेकर सम्राट हेल्गा के महल में भेजा धीरे-धीरे कारवां पहाड़ी पगडंडियों के ऊपर बड़ा। सबसे आगे युवा किसान था। वह राजा के झंडे को अपने हाथ में उठाए था। जब सम्राट हेल्गा को राख की रस्सी, टेढ़े मेढ़े तने में से पूरोया धागा और खुद बजती ढोलक दिखाई गई तो वह बेहद प्रभावित हुआ। और उसने अपनी दाढ़ी सेहलाई।
"मुझे लगता है कि तुम्हारे गांव के लोग बहुत समझदार है और होशियार है"
उसने कहा "क्योंकि तुम लोगों ने तीन असंभव लगने वाले समस्याओं को सुलझाया है इसलिए तुम अब आराम से घर जाओ"
सम्राट हेल्गा ने युवा किसान से कहा
"अपने लोगों से कहो कि अब वह शांति से अपनी जिंदगी जिये "
 उसके बाद से सम्राट हेल्गा ने कभी दोबारा उस छोटे गांव पर आक्रमण नहीं किया छोटा गांव धीरे-धीरे बहुत समृद्ध हुआ, युवा किसान अपनी मां के सात बहुत साल जीवित रहा। 

आपको ये budhiya ki kahani कैसी लगी कमेंट में जरूर बताए।

budhiya ki kahani 2 

बुढ़िया और चावल चोर 

budhiya ki kahani
ek budhiya ki kahani


6 min ki budhiya ki kahani

"हर रात कोई चोर मेरा चावल चुराता है" बूढ़ी औरत ने कहा और फिर वह राजा से मदद लेने गई। राजा शिकार के लिए बाहर गया था लेकिन सौभाग्य से उसे रास्ते में कुछ बहुत ही चतुर दोस्त मिले एक बिच्छू मछली एक बेल का फल, गोबर, एक उस्तरे और एक मगरमच्छ की मदद से बूढीया चोर को पकड़ने में सफल रही अब वह जितना चाहे उतना चावल खा सकती थी"

एक बूढ़ी औरत थी जिसे चावल पसंद था। हर सुबह वह आधे चावल ठंडे पानी के बर्तन में भिगोती थी। जिससे वह उन्हें उबाल सके। बाकी आधे हिस्से का वह मुरमुरा बनाती थी और फिर गरम रखने के लिए उसे तवे पर रख देती थी। इस तरह वह हमेशा भगोने में ठंडा उबला चावल और तवे पर गर्म मुरमुरा रखती थी। बूढ़ी औरत काफी खुश और संतुष्ट थी। फिर एक चोर हर रात खाता और भागोने में से कुछ ठंडा चावल और तवे से कुछ मुरमुरा चुरा कर ले जाता था। परेशान होकर बुढ़िया ने अपनी चलने वाली छड़ी उठाई और वह राजा से शिकायत करने के लिए निकल पड़ी। जल्द ही वह एक तालाब के किनारे आ पहुंची। तालाब में एक बिच्छू मछली थी जिस ने उससे पूछा
"बूढ़िया तुम कहां जा रही हो?"
"हर रात एक चोर मेरा चावल चुराता है, मैं राजा से शिकायत करने जा रही हूं"
बिच्छू मछली ने कहा
"वापस लौटते समय तुम मुझे अपने साथ ले चलना मैं जरूर तुम्हारी कुछ मदद कर पाऊंगी"
 "अच्छा"
 बूढ़िया ने कहा
वो सड़क के किनारे किनारे चलती गई फिर वह एक बेल के पेड़ के पास आई एक बेल जमीन पर गिरा पड़ा था। और उसने पूछा
"बूढ़िया तुम कहां जा रही हो?"
"हर रात एक चोर मेरा चावल चुराता है, इसलिए मैं राजा से शिकायत करने जा रही हूं"
बेल ने कहा
"वापस लौटते समय तुम मुझे अपने साथ ले जाना मैं जरूर तुम्हारी कुछ मदद कर पाऊंगा"
"अच्छा"
बुढ़िया ने कहा।
थोड़ी दूर पर उसने एक उस्तरा देखा उस उस्तरा ने पूछा
"बुढ़िया तुम कहां जा रही हो?"
"हर रात एक चोर मेरे चावल चुराता है और मैं राजा से शिकायत करने जा रही हूं"
उस्तरा बोला
"वापस लौटते समय तुम मुझे अपने साथ ले चलना मैं जरूर तुम्हारी कुछ मदद कर पाऊंगा"
"अच्छा"

बुढ़िया ने कहा।
जैसे-जैसे वह आगे चली उसे सड़क पर कुछ गोबर पड़ा हुआ देखा जब बूढ़ी औरत उसके पास आई तो गोबर ने उससे पूछा
"बुढ़िया तुम कहां जा रही हो?"
"हर रात के चोर मेरे चावल चुराता है इसलिए मैं राजा से राजा को बताने के लिए जा रही हूं"
"वापस लौटते समय तुम मुझे अपने साथ ले चलना मैं जरूर तुम्हारी कुछ मदद कर पाऊंगा"
 "अच्छा"
बुढ़िया ने कहा।
राजा के महल में पहुंचने से ठीक पहले  बुढ़िया के पास पहुंची। नदी में एक मगरमच्छ दिखाई दिया मगरमच्छ ने पूछा
"बुढ़िया तुम कहां जा रही हो?"
"हर रात के चोर मेरे चावल चुराता है इसलिए मैं राजा से राजा को बताने के लिए जा रही हूं"
मगरमच्छ ने कहा
"वापिस लौटते समय तुम मुझे अपने साथ ले चलना में जरूर तुम्हारी कुछ मदद कर पाऊंगा"
"अच्छा"
बुढ़िया ने कहा।

जब वह राजा के माहौल में पहुंची तो उसने पाया कि राजा बाघों का शिकार करने गया था और अगले दिन ही वापस आने वाला था। अपने घर जाते समय बुढ़िया ने मगरमच्छ, गोबर, उतसरा, बेल और बिच्छू मछली को उठाकर उन्हें अपने बोरे में डाल दिया। जब वे उनके घर आए तो
मगरमच्छ ने कहा
"तुम मुझे अपने तालाब में छोड़ दो"
गोबर ने कहा
"मुझे सीढ़ियों के नीचे रखो"
उसतरा बोला
"मुझे गोबर के पास घास में डाल दो"
 बेल ने कहा
"मुझे चुले के ऊपर रख दो"
बिच्छू मछली ने कहा
"मुझे चावल उबालने वाले पतेले  में रख दो"

उसके बाद बूढ़ी औरत ने मुरमुरा खाया और उन सभी से शुभरात्रि कह कर वह बिस्तर में सोने चली गई। आधी रात को चोर आया और अंदर गुस्सा और कुछ उबले हुए चावल को चुराने के लिए भगोने के पास गया। अंदर बिच्छू मछली थी उसने चोर को इतनी जोर से डंक मारा कि वह जोर से उचल कर नीचे गिर गया। फिर चोर कुछ मुरमुरे चुराने के लिए चूल्हे पर गया, जब उसने बर्तन को छुआ तो बेल का फट गया।  बेल के गर्म बीज  गोलियों जैसे चोर के शरीर में लगे और उसके होश उड़ गए। चोर बाहर आकर धराशाई हो गया। लेकिन अंधेरे में चोर गोबर पर फिसल गया और फिर उसतरे के ऊपर दम कर के बैठा। फिर चोर चिल्लाता हुआ खुद को धोने के लिए तालाब की तरफ भागा जैसे ही उसने पानी में पैर रखा मगरमच्छ ने उसे काट लिया।

 "अरे बाप रे"
वह दर्द से चिल्लाया
बुढ़िया चोर के पीछे भागी वह चिल्लाई
"चोर चोर"
इस शोर ने पड़ोसियों को जगा दिया अब हर कोई चोर को पकड़ने के लिए उसके पीछा करने में शामिल हो गया उन्होंने उसका बहुत देर तक पीछा किया। फिर वह चोर वापस कभी नहीं आया।
उसके बाद बूढ़ी औरत के पास हमेशा भगुने में उबला हुआ चावल और मुरमुरे खाने को होता था।


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